कॉमबिफ्लेम लेने से पहले अब हो जाएँ सावधान

भारत में कोई भी बीमारी होने पर सबसे पहला सुझाव दिया जाता है कि कॉमबिफ्लेम खा लो। यह दावा बहुत ही पॉपुलर पेन किलर है। लेकिन  इस दावा को लेने वालों के लिये अब एक बुरी खबर है।

फ्रेंच फार्मा कंपनी सनोफी ने सैम्पल टेस्ट मे फेल होने के कारण भारत से कॉमबिफ्लेम के 4  बैच वापस मंगाने का फैसला किया है।

combiflam-1463054790

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड  कंट्रोल आर्गनाइजेशन  कॉमबिफ्लेम की कई खेप सस्ती क्वालिटी की होने के कारण भारतीय बाज़ार से वापस मंगवा रहा है।

कौन से हैं वो बैच जो हटाये गए हैं-
सीडीएससीओ  ने जून 2015 और जुलाई 2015 मे तैयार किये गए बैचो को निम्न क्वालिटी का माना है। इनकी एक्सपाइरी डेट मई 2018 से जून 2018 के बीच की है।
किन स्टैंडर्ड्स पर फेल हुई दावा-
कॉमबिफ्लेम के कुछ बैच स्तरीय गुणवत्ता के इसलिए नही पाये गए क्योंकि ये डिसइंटीग्रेशन टेस्ट मे असफल रहे।
डिसइंटीग्रेशन टेस्ट का प्रयोग मानव शरीर में पहुँचकर किसी टैबलेट या कैप्सूल के टूटने के समय को मापने के लिए होता है।
सीडीएससीओ के अनुसार कॉमबिफ्लेम के के बैच नियामक की ओर से तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार नही निकले।

कंपनी की सफाई-
भारत में सनोफी के पांच सबसे बड़े ब्रांडों में से एक कॉम्बिफ्लेम पैरासिटामोल और आईबूप्रोफेन का कॉम्बिनेशन है। लिहाजा सनोफी ने सफाई दी है कि कॉम्बिफ्लेम के मामले में डिसइंटीग्रेशन टाइम में देरी दर्ज की गई है लेकिन डॉक्टर और मरीज भरोसा रखें कि इससे दवा की क्षमता और मरीजों की सेफ्टी पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी पहले ही दो बैच की दवाएं वापस ले चुके हैं जबकि दो बैचों की वापसी का काम जारी है।
क्या हैं इस दवाई के साइड इफेक्ट्स –
इस दवाई का डिशइंटीग्रेशन टेस्ट मे फेल होना मानव स्वास्थ्य के लिए बडा खतरा है। यह दवा इसी मानक पर फेल हुइ है और एक बड़ी खेप सब-स्टैंडर्ड पाइ गई है। इस दवा के इस्तेमाल से मरीज़ के पेट मे ब्लीडिंग हो सकती है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की दिक्कतें और दस्त की समस्या भी देखी जा सकती है।

LEAVE A REPLY