अभी तक बढ़ते है इस ममी (लाश) के बाल और नाखून

प्राचीन मिस्र की सभ्यता में किसी भी इंसान की मौत के बाद उसके शव को केमिकल्स से संरक्षित करके ममी बनाई जाती थी। मिस्र के अलावा दूसरे देशों में भी ममी बनाने की प्रथा पाई गई है जैसे इटली का कापुचीन केटाकोम्ब।

लेकिन आज हम आपको ऐसी ममी के बारे में बता रहे हैं जो प्राकृतिक रूप से पाई गई है यानि कि जो बिना किसी केमिकल के द्वारा संरक्षित है और सामान्य अवस्था में भी है।

Mummy

यह ममी हिमाचल प्रदेश के लाहुल स्पीति के गीयु गाँव में है। यह ममी लगभग 550 साल पुरानी है और इसके बाल और नाखून आज भी बढ़ रहे हैं। और सबसे खास बात तो ये है कि यह ममी बैठी हुई अवस्था में है जबकि दुनिया में पाई गई बाकी ममी लेटी हुई अवस्था में मिली हैं।

गांव वालो के अनुसार ये ममी पहले गांव में ही रखी हुई थी और एक स्तूप में स्थापित थी पर 1974 में भूकम्प आया तो ये कहीं पर दब गयी। उसके बाद सन 1995 में आई टी बी पी (I.T.B.P.) के जवानो को सडक बनाते समय ये ममी मिली । कहा जाता है कि उस समय कुदाल सिर में लगी और कुदाल लगने के बाद ममी के सिर से खून भी निकला जिसका निशान आज भी मौजूद है । इसके बाद सन 2009 तक ये ममी आई टी बी पी के कैम्पस में ही रखी रही । बाद में गांव वालो ने इस ममी को गांव में लाकर स्थापित कर दिया। ममी को रखने के लिए शीशे का एक कैबिन बनाया गया जिसमें इसे रखा गया।इस ममी की देखभाल गांव में रहने वाले परिवार बारी-बारी से करते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को वे ममी के बारे में जानकारी देते है।सालाना यहां पर देश विदेश के हजारों पर्यटक इस मृत देह को देखने आते हैं।
इस ममी के बाल भी हैं। ममी निकलने के बाद इसकी जांच की गयी थी जिसमें वैज्ञानिको ने बताया था कि ये 545 वर्ष पुरानी है । पर इतने साल तक बिना किसी लेप के और जमीन में दबी रहने के बावजूद ये ममी  कैसे इस अवस्था में है ये आश्चर्य का विषय है ।

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जैसा कि अधिकतर होता है कि हर प्राचीन चीज़ से कोई किवदंती जुड़ जाती है। इस ममी के साथ भी ऐसी ही एक किवदंती जुडी है। ऐसी मान्यता है कि करीब 550 वर्ष पूर्व गीयू गांव में एक संत थे। गीयू गांव  में इस दौरान बिछुओं का बहुत प्रकोप हो गया। इस प्रकोप से गांव को बचाने के लिए इस संत ने ध्यान लगाने के लिए लोगों से उसे जमीन में दफन करने के लिए कहा। जब इस संत को जमीन में दफन किया गया तो इसके प्राण निकलते ही गांव में इंद्रधनुष निकला और गांव बिछुओं से मुक्त हो गया। जबकि कुछ लोगो का कहना है कि ये ममी  बौद्ध भिक्षु सांगला तेनजिंग की है जो तिब्बत से भारत आये और यहां पर जो एक बार मेडिटेशन में बैठे तो फिर उठे ही नही ।
मिश्र में ममी को कोफिन में से निकाल कर उनकी सफाई की जाती है ताकि वे आने वाले सालों में सुरक्षित रहें लेकिन यहां ऐसा नहीं किया जाता। इस मृत देह की देख-भाल मिश्र में रखी गई ममीज़ की तर्ज पर होनी चाहिए यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले समय में इस पर्यटन स्थल का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। अभी तक यही माना जाता था कि ममी के बाल और नाखुन निरंतर बढ़ते हैं लेकिन गीयू गांव के लोगों के मुताबिक अब Mummy के बाल और नाखुन बढऩे कम हो गए हैं। बाल कम होने के कारण Mummy का सिर गंजा होने लगा है।

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