इसरो को मिली बड़ी सफलता!

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ने एक साथ बीस उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया, इससे पहले 28 अप्रैल 2008 को इसरो ने पीएसलवी – 9 से एक साथ 10 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया था l
26 मिनट के मिशन में एक साथ पीएसलवी-सी 34 से 20 उपग्रहों को सूर्य स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया गया छोड़ें गए उपग्रहों में तीन भारतीय, तेरह अमेरिकी, दो कनाडा एक जर्मनी और एक इंडोनेशिया के  उपग्रह है, भारत के तीन उपग्रहों के नाम कार्टोसैट-2, सत्यभामा और स्वयं है l
 2pslv-c34_take_off_-_view_2
इससे पहले एक साथ इतने उपग्रहों का प्रक्षेपण करने का ताज़ रूस और अमेरिका के सिर रहा है अब भारत भी इस सूची में शामिल हो गया है , रूस ने 2014 में एक साथ 37 उपग्रह और अमेरिका ने 2013 में 29 उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड बनाया हैl
इस मिशन से भारत की धाक अंतरिक्ष जगत में बनी है, ये इसरो के खाते की पहली सफलता नहीं है इससे पहले भी इसरो ने वो कर दिखाया जो अमेरिका और चीन जैसे देश नहीं कर पाएं, 2014 में भारत का मंगलयान 67 करोड़ किलोमीटर का सफर पूरा कर पहली ही कोशिश में सीधे मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचा था, इस मंगलयान पर सिर्फ 450 करोड़ रुपए खर्च हुए थे जितने में हॉलीवुड की फिल्में बनती है l
मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला इसरो एशिया की पहली अंतरिक्ष एजेंसी है और विश्व में भारत चौथा देश है जिसने मंगल मिशन पूरा किया है
यह प्रक्षेपण अमेरिका जैसे देशों के लिए सबक है जिसने सीनेट में प्रस्ताव पारित किया था गया था जिसमे कहा गया था कि अमेरिका कभी भी भारत की जमीन से कोई भी उपग्रह प्रक्षेपित नहीं करेगा लेकिन 2015  में अमेरिका ने 4 लीमर नैनो उपग्रहों का प्रक्षेपण भारत से कराया और इस बार 13 उपग्रहों का l
हमारी ध्रुवीय राकेट की प्रोद्योगिकी परिपक्व हो चुकी है इस वजह से दूसरे देश भी हमसे प्रक्षेपण करातें हैं इतनी सस्ती लॉन्चिंग कॉस्ट में कोई कोई भी अंतरिक्ष एजेंसी ऐसा साहस नहीं कर सकती अन्य अंतरिक्ष एजेंसी की तुलना में भारत की लॉन्चिंग कॉस्ट 60 प्रतिशत तक कम होती है l
विश्व में इस समय तीन अरब डॉलर का अंतरिक्ष मार्केट है उपग्रह प्रक्षेपण की दरें कम होने से और भी देश भारत की प्रक्षेपण सेवा ले सकते हैं ,अबतक कुल 20 देश इसरो की सेवा ले चुके है जिससे भारत को छह सौ करोड़ रुपए मिलें हैl
इसरो ने अबतक  विदेशी उपग्रहों का 100 प्रतिशत सफल प्रक्षेपण किया है, इसरो के सफर की शुरुआत 1963 में हुई थी भारत का अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट था जिसका प्रक्षेपण भारत ने 1975 में सोवियत संघ से कराया था l
बेशक हमारे पास अमेरिका या चीन जैसी सुविधाएं नहीं हैं पर अंतरिक्ष की दुनिया का इतिहास जब भी लिखा जाएगा इसरो का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज़ किया जाएगा l

LEAVE A REPLY